4.6 शेयर क्रॉपिंग - मुसाक़ात
4.6 Share Cropping - Musaqat
काम के प्रकारों में से एक है मुसाक़ात, जिसमें एक व्यक्ति अपने पेड़ों को दूसरे व्यक्ति को सौंपता है ताकि वह उन्हें सींचे और उनकी देखभाल करे, और बदले में उनके फल का एक निश्चित हिस्सा ले। इसे मुसाक़ात (जिसका शाब्दिक अर्थ है सिंचाई) इसलिए कहा गया क्योंकि इसका संबंध सिंचाई के काम से है, क्योंकि हिजाज़ के लोगों के पेड़ों को मुख्य रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए वे कुओं से पानी खींचते थे। मुसाक़ात उन कामों में से है जिन्हें शरीअत ने जायज़ ठहराया है। मुस्लिम ने रिवायत किया है कि अब्दुल्लाह इब्न उमर (रज़ि.) ने कहा: "अल्लाह के रसूल ﷺ ने ख़ैबर के लोगों के साथ उनकी पैदावार के आधे हिस्से पर मुआमला किया।" मुसाक़ात खजूर के पेड़ों और अंगूर की बेलों में, फसल के एक ज्ञात हिस्से पर जायज़ है, जो काम करने वाले को दिया जाएगा। यह हुक्म केवल उन पेड़ों पर लागू होता है जिन पर फल लगते हैं। वे पेड़ जिन पर या तो कोई फल (फसल) नहीं होता, जैसे बेद (विलो), या जिनका फल वांछित नहीं होता, जैसे चीड़ और देवदार, उनमें मुसाक़ात जायज़ नहीं है, क्योंकि मुसाक़ात फल (फसल) के एक हिस्से के बदले होती है, और इन प्रकार के पेड़ों का कोई वांछित फल नहीं होता। लेकिन वे पेड़ जिनके पत्ते वांछित होते हैं, जैसे शहतूत और गुलाब, उनमें मुसाक़ात जायज़ है, क्योंकि उनके पत्ते फल के समान हैं। यह हर साल तोड़े जाते हैं और इनका संग्रह करना संभव है, इसलिए इनके एक हिस्से के बदले मुसाक़ात में प्रवेश किया जा सकता है, और इस प्रकार फल वाला वही हुक्म लागू होता है।