4.6 ख़िलाफ़त किन लोगों के द्वारा अनुबंधित (contract) की जाती है?
4.6 By which people is the Khilafah contracted
खुलफ़ा-ए-राशिदीन की बैअत और सहाबा के इज्मा (सर्वसम्मति) में जो कुछ हुआ, उस पर विचार करने से यह निष्कर्ष निकलता है कि ख़िलाफ़त बैअत के द्वारा अनुबंधित (स्थापित) होती है। अबू बक्र की बैअत में मदीना के मुसलमानों के प्रभावशाली लोगों (अहलुल हल्ल वल-अक़्द) की बैअत ही ख़िलाफ़त स्थापित करने के लिए काफ़ी थी। न मक्का के मुसलमानों से सलाह ली गई, न अरब प्रायद्वीप के अन्य भागों में रहने वालों से, बल्कि उनसे इस मामले पर उनकी राय तक नहीं पूछी गई। उमर की बैअत में भी यही हुआ। उस्मान की बैअत के बारे में, अब्दुर्रहमान बिन औफ़ ने मदीना के मुसलमानों से उनकी राय पूछी और केवल प्रभावशाली लोगों से पूछकर संतुष्ट नहीं हुए। अली की बैअत लेते समय मदीना और कूफ़ा के अधिकतर लोगों ने उन्हें बैअत दी, और उनकी बैअत विशेष रूप से ली गई। उनकी बैअत उन लोगों के लिए भी वैध थी जिन्होंने उनका विरोध किया और उनसे लड़े, क्योंकि उन्होंने वास्तव में किसी दूसरे व्यक्ति को बैअत नहीं दी थी और न ही उनकी बैअत पर आपत्ति की थी। बल्कि उन्होंने उस्मान के ख़ून (उनकी हत्या) का बदला माँगा था। अतः उनके बारे में यह निर्णय था कि वे बाग़ी थे जो एक विशेष मुद्दे पर ख़लीफ़ा से अलग हो गए थे। इस स्थिति में ख़लीफ़ा को उन्हें मामले की वास्तविकता समझानी थी और उनसे लड़ना था। इन बाग़ियों ने कोई दूसरी ख़िलाफ़त स्थापित नहीं की।