3.3 सभी मुसलमानों पर एक ख़लीफ़ा की नियुक्ति अनिवार्य है
3.3 The appointment of one Khaleefah is obligatory on all Muslims
तीसरे सिद्धांत के बारे में, कि एक ख़लीफ़ा की स्थापना सभी मुसलमानों पर अनिवार्य है, उसकी पुष्टि निम्नलिखित हदीस से होती है। मुस्लिम ने नाफ़ि‘ से वर्णन किया कि उन्होंने कहा: 'अब्दुल्लाह इब्न 'उमर ने मुझसे कहा: मैंने अल्लाह के रसूल ﷺ को यह फ़रमाते हुए सुना:
As for the third principle, that the establishment of one Khaleefah is an obligation on all Muslims, the following Hadith has confirmed this. Muslim narrated from Naf ’i that he said: ‘Abdullah Ibnu ‘Umar said to me: I heard the Messenger of Allah (pbuh) say:
“जो व्यक्ति अल्लाह की आज्ञाकारिता से अपना हाथ खींच लेता है, वह क़ियामत के दिन अल्लाह (SWT) से इस हाल में मिलेगा कि उसके पास अपने बचाव में कोई दलील नहीं होगी; और जो व्यक्ति इस हाल में मरा कि उसकी गर्दन पर बैअत (निष्ठा की प्रतिज्ञा) नहीं थी, वह जाहिलियत (अज्ञानता) की मौत मरा।” इस हदीस में अल्लाह के रसूल ﷺ ने हर मुसलमान पर अपनी गर्दन पर किसी ख़लीफ़ा की बैअत होना अनिवार्य किया है, परंतु उन्होंने हर मुसलमान के लिए बैअत देना अनिवार्य नहीं किया। अनिवार्यता यह है कि हर मुसलमान की गर्दन पर एक बैअत मौजूद हो, यानी एक ऐसा ख़लीफ़ा हो जिसके अस्तित्व के कारण हर मुसलमान की गर्दन पर उसकी बैअत का हक़ बनता है। ख़लीफ़ा का अस्तित्व ही वह बात है जो हर मुसलमान की गर्दन पर बैअत को आरंभ करती है, चाहे मुसलमान ने वास्तव में बैअत दी हो या नहीं। जहाँ तक ख़िलाफ़त की एकता और एक से अधिक ख़लीफ़ा रखने की मनाही की बात है, तो यह उस हदीस के कारण है जिसे मुस्लिम ने अबू सईद अल-ख़ुदरी से, उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ से रिवायत किया है, कि आप ﷺ ने फ़रमाया: