6.1.3 ख़लीफ़ा की नियुक्ति
6.1.3 Appointing the Khaleefah
जब मुसलमानों का ख़लीफ़ा सेवानिवृत्त होता है, मृत्यु को प्राप्त होता है, या किसी भी कारण से पद से हटाया जाता है, तो इस्लाम में स्वचालित उत्तराधिकार या "शाही परिवार" की कोई अवधारणा नहीं है। इसके बजाय, इस्लाम में नेतृत्व मुसलमानों और ख़लीफ़ा के बीच एक अनुबंध है। उसका अधिकार पूरी तरह से उम्मत की स्वीकृति पर निर्भर करता है, जिसका प्रतिनिधित्व उसके बय'अह (निष्ठा की प्रतिज्ञा) देने के द्वारा होता है। आप नए ख़लीफ़ा की नियुक्ति में शामिल होते हैं। ये वे कदम हैं जो उठाए जाते हैं:
When the Khaleefah of the Muslims retires, dies or is displaced for any reason, there is no concept of automatic succession or ‘Royal Family.’ Rather, leadership in Islam is a contract between the Muslims and the Khaleefah. His authority depends entirely on the acceptance of the Ummah, which is represented by their giving him the bay‘ah (pledge of allegiance). You are involved in appointing the new Khaleefah. These are the steps taken :
जो भी उम्मीदवार इस पद को ग्रहण करना चाहते हैं, वे मजलिस अल-उम्माह (उम्मत की परिषद) को आवेदन करें। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो इस पद के योग्य हो, तो आप स्वयं किसी भी उम्मीदवार का प्रस्ताव रख सकते हैं। मजलिस के सदस्य सभी आवेदकों पर विचार करेंगे और यह मूल्यांकन करेंगे कि वे इस्लाम द्वारा खलीफा के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं। खलीफा को यह होना चाहिए: