अनुच्छेद 89
Article 89
मज़ालिम की अदालतों (अत्याचार-निवारण अदालतों) में नियुक्त किए जाने वाले न्यायाधीशों की कोई सीमा नहीं है; बल्कि ख़लीफ़ा जितने भी न्यायाधीश ज़रूरी समझे, नियुक्त कर सकता है, ताकि मज़ालिम (अत्याचार के कार्यों) का उन्मूलन हो सके, चाहे वह संख्या जितनी भी हो। यद्यपि एक अदालत की बैठक में एक से अधिक न्यायाधीशों का बैठना जायज़ है, फिर भी फ़ैसला सुनाने का अधिकार केवल एक ही न्यायाधीश को है। बाक़ी न्यायाधीश केवल सहायता करते हैं और सलाह देते हैं, और उनकी सलाह बाध्यकारी नहीं होती।
There is no limit to the number of judges that can be appointed for the Court of Injustice Acts (Madhalim), rather the Khalifah can appoint as many as he may deem necessary to eradicate the Madhalim (injustice acts), whatever that number may be. Although it is permitted for more than one judge to sit in a court session, only one judge has the authority to pronounce a verdict. The other judges only assist and provide advice, and their advice is not binding.
मज़ालिम की अदालत (अदालत-ए-मज़ालिम) का न्यायाधीश एक से अधिक हो सकता है, इसका प्रमाण यह है कि ख़लीफ़ा को अनुमति है कि वह अपनी ओर से एक या अधिक प्रतिनिधि नियुक्त करे जो उसकी जगह कार्य करें। परंतु यदि मज़ालिम की अदालत के कई न्यायाधीश हों, तो उनकी मज़ालिम (अन्याय/अत्याचार के मामलों) को देखने की शक्ति बाँटी नहीं जा सकती, इसलिए उनमें से हर एक को मज़ालिम के मामलों को देखने का अधिकार होगा। फिर भी ख़लीफ़ा को अधिकार है कि वह मज़ालिम की अदालत के लिए किसी एक न्यायाधीश को एक प्रांत के लिए निर्दिष्ट करे, या उसे किसी विशेष प्रकार के मामलों तक सीमित कर दे, क्योंकि उसे मज़ालिम पर सामान्य शासन (गवर्नरशिप) देने का अधिकार है, और यदि वह चाहे तो विशेष शासन भी दे सकता है। वह अपने विवेक के अनुसार पूरे राज्य पर, या किसी नगर या क्षेत्र पर शासन दे सकता है।