16 उम्मत परिषद: शूरा और मुहासबा (हिसाब-किताब)
16 The Ummah Council The Consultation Shura and Accounting Muhasabah
अनुच्छेद 105
Article 105
जो लोग मुसलमानों के विचारों को ख़लीफ़ा के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, वे उम्मत परिषद (मजलिस-ए-उम्मा) के सदस्य हैं, और जो लोग प्रांतों में जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे प्रांतीय परिषदें हैं। किसी भी शासक द्वारा किए गए अत्याचार या इस्लामी क़ानूनों के ग़लत प्रयोग के विरुद्ध शिकायत उठाने के उद्देश्य से शूरा परिषद में गैर-मुसलमानों का सदस्य होना जायज़ है।
The individuals who represent the Muslims’ views to the Khalifah are the Ummah Council, and the individuals who represent the people in the provinces are the Provincial Councils. It is permitted for non-Muslims to be members in the Shura council for the sake of raising any complaints against any oppression by the rulers or misapplication of the laws of Islam.
यह एक परिषद (Council) है जिसका गठन उन व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जो आम मुसलमानों की राय का प्रतिनिधित्व करते हैं, ताकि ख़लीफ़ा विभिन्न मामलों पर परामर्श के लिए इसकी ओर रुज़ू कर सके। ये लोग बदले में उम्मत के प्रतिनिधि होते हैं, जो शासकों को जवाबदेह ठहराने का काम करते हैं। यह बात अल्लाह के रसूल ﷺ के उन कुछ अंसार और मुहाजिरीन के लोगों से परामर्श करने से निकाली जाती है, जो अपनी क़ौम के प्रतिनिधि थे। यह बात रसूल ﷺ द्वारा अपने कुछ साथियों को शूरा (परामर्श) के लिए नियुक्त करने से भी निकाली जाती है। आप ﷺ राय लेने के लिए दूसरों की तुलना में उनसे अधिक परामर्श लिया करते थे, जैसे अबू बक्र (रज़ि.), उमर (रज़ि.), हमज़ा (रज़ि.), अली (रज़ि.), सलमान अल-फ़ारसी (रज़ि.), हुज़ैफ़ा (रज़ि.)….