अनुच्छेद 19
Article 19
यह जायज़ नहीं है कि कोई व्यक्ति शासन की ज़िम्मेदारी संभाले, या शासन से संबंधित कोई भी कार्य करे, जब तक वह पुरुष, स्वतंत्र, बालिग़, समझदार, न्यायप्रिय और उस ज़िम्मेदारी को निभाने में सक्षम न हो। और यह भी जायज़ नहीं है कि कोई मुसलमान के सिवा किसी और को यह ज़िम्मेदारी दी जाए।
It is not permitted for anyone to be in charge of ruling or any action considered to be from the ruling unless they are male, free, adult, sane, just, capable of carrying out the responsibility, and it is not permitted for anyone other than a Muslim.
अल्लाह (SWT) ने निश्चित रूप से यह हराम ठहराया है कि कोई काफ़िर मुसलमानों पर शासक बने, जैसा कि अल्लाह (SWT) फ़रमाता है।
Allah (swt) has decisively prohibited for a disbeliever to be a ruler over the Muslims, as Allah (swt) says.
“और अल्लाह कभी भी काफ़िरों को ईमानवालों पर कोई रास्ता (विजय का) नहीं देगा।” (TMQ 4:141), और काफ़िर को मुसलमानों पर शासक बनाना उसे उन पर रास्ता देना है, और अल्लाह (swt) ने अपने "कभी नहीं" (لن) शब्द के प्रयोग द्वारा इसे सख़्ती से वर्जित किया है। यह इस बात का संकेत है कि काफ़िर का मुसलमानों पर रास्ता रखना, यानी उनका शासक होना, एक निश्चित (क़त्ई) निषेध है, और इसलिए यह इस बात को दर्शाता है कि इसे हराम ठहराया गया है। इसके अलावा, अल्लाह (swt) ने तलाक़ के बाद पत्नी की ओर लौटने के लिए गवाह का मुसलमान होना शर्त ठहराया है; अल्लाह (swt) कहता है।