6 ख़िलाफ़त की वापसी
6 The Return Of The Khilafah
"नुबुव्वत तुम्हारे बीच तब तक रहेगी जब तक अल्लाह चाहेगा कि वह रहे। फिर वह उसे उठा लेगा, यदि वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर नुबुव्वत के तरीक़े पर ख़िलाफ़त होगी, और चीज़ें वैसी ही होंगी जैसी अल्लाह चाहेगा कि वे हों। फिर वह उसे उठा लेगा, यदि वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर वंशानुगत शासन होगा, और चीज़ें वैसी ही होंगी जैसी अल्लाह चाहेगा कि वे हों। फिर वह उसे उठा लेगा, यदि वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर अत्याचारी शासन होगा, और चीज़ें वैसी ही होंगी जैसी अल्लाह चाहेगा कि वे हों। फिर वह उसे उठा लेगा, यदि वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर नुबुव्वत के तरीक़े पर ख़िलाफ़त होगी।" फिर नबी ﷺ ख़ामोश हो गए।
“Prophethood will last with you for as long as Allah wants it to last. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be Khilafah according to the method of Prophethood, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be a hereditary rule, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be an oppressive rule, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be a Khilafah according to the method of Prophethood.” Then he (saw) fell silent”
ख़िलाफ़त की वापसी
The Return of the Khilafah
इमाम अहमद ने अपनी मुसनद (खंड चार, पृष्ठ 273) में अल-नुʿमान इब्न बशीर (रज़ि.) से रिवायत किया है कि उन्होंने कहा कि नबी ﷺ ने फ़रमाया, "नुबुव्वत तुम्हारे बीच तब तक रहेगी जब तक अल्लाह चाहेगा कि वह रहे। फिर वह उसे उठा लेगा जब वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर नबुव्वत के तरीक़े पर ख़िलाफ़त होगी, और मामले वैसे ही होंगे जैसे अल्लाह चाहेगा। फिर वह उसे उठा लेगा जब वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर वंशानुगत शासन होगा, और मामले वैसे ही होंगे जैसे अल्लाह चाहेगा। फिर वह उसे उठा लेगा जब वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर ज़ुल्म भरा शासन होगा, और मामले वैसे ही होंगे जैसे अल्लाह चाहेगा। फिर वह उसे उठा लेगा जब वह चाहेगा कि उसे उठा ले। फिर नबुव्वत के तरीक़े पर ख़िलाफ़त होगी।" फिर वह ﷺ चुप हो गए। अल्लाह के रसूल ﷺ ने ख़िलाफ़त के अंत और विनाश के बाद उसकी वापसी की भविष्यवाणी की है। आज हम उस ज़ुल्म भरे शासन को देख रहे हैं जिसकी ख़बर अल्लाह के रसूल ﷺ ने हमें दी थी, और साथ ही हम उस ख़िलाफ़त की वापसी के क़रीब पहुँच रहे हैं जो अल्लाह के रसूल ﷺ के मिन्हाज पर होगी, जैसा कि उन्होंने ﷺ फ़रमाया कि वह फिर से लौटेगी।
Imam Ahmad in his Musnad (volume four page 273) narrated from al-Nu’man Ibn Bashir (ra) as saying that the Prophet had stated, “Prophethood will last with you for as long as Allah wants it to last. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be Khilafah according to the method of prophethood, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be a hereditary rule, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be an oppressive rule, and things will be as Allah wishes them to be. Then He will end it if He wishes to end it. Then there will be a Khilafah according to the method of Prophethood.” Then he (saw) fell silent” The Messenger of Allah (saw) has foretold the return of the Khilafah after its demise and destruction. Today we are witnessing the oppressive rule that the Messenger of Allah (saw) informed us of, however we are also nearing the return of the Khilafah that is upon the Minhaj of the Messenger of Allah (saw) that he (saw) stated would once again return.
यह समझना चाहिए कि इस्लाम की दा'वत देने वाले और ख़िलाफ़त की स्थापना के लिए काम करने वाले मोमिनों और उनके वाहकों पर बढ़ता हुआ ज़ुल्म इस बात की निशानी है कि ख़िलाफ़त की वापसी क़रीब है, और मुनाफ़िक़ हुक्मरानों का इसे स्वीकार करना भी इसी का सबूत है। हमें ऐसे ज़ालिमों के मुक़ाबले में अपने विश्वास को मज़बूत करना चाहिए और दृढ़ता, सब्र और डटे रहने को बढ़ाना चाहिए, रसूलुल्लाह ﷺ के उस फ़रमान से जो इमाम अहमद ने अपनी मुसनद में मक़ाल इब्न यसार से रिवायत किया है, कि उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया, "मेरे जाने के बाद ज़ुल्म ज़्यादा देर तक नहीं रहेगा। जितना ज़ुल्म प्रकट होगा, उतना ही इंसाफ़ चला जाएगा, यहाँ तक कि ऐसे लोग ज़ुल्म में पैदा होंगे जिन्होंने इसके सिवा कुछ और कभी जाना ही नहीं होगा। फिर अल्लाह इंसाफ़ लाएगा, और जितना इंसाफ़ आएगा, उतना ही ज़ुल्म चला जाएगा, यहाँ तक कि ऐसे लोग इंसाफ़ में पैदा होंगे जिन्होंने इसके सिवा कुछ और कभी जाना ही नहीं होगा।" हम अब ख़िलाफ़त की वापसी की दहलीज़ पर खड़े हैं। इसकी वापसी के बारे में बहुत सी रिवायतें और भविष्यवाणियाँ मौजूद हैं। निस्संदेह रसूलुल्लाह ﷺ ने ख़बर दी थी कि इस्लाम का शासन लौटेगा, और यह कि वह अल-क़ुद्स में अपना स्थान लेगा, क्योंकि ख़िलाफ़त का केंद्र अल-क़ुद्स में होगा।