21 कागज़ी मुद्रा की ज़कात
21 Zakat of Paper Currency
कागज़ी मुद्रा वे वित्तीय काग़ज़ात हैं जिन्हें राज्य जारी करता है और अपनी मुद्रा तथा धन के रूप में निर्धारित करता है, जिनके द्वारा वस्तुओं की क़ीमतें और सेवाओं का भुगतान आँका जाता है। इस कागज़ी मुद्रा पर ज़कात सोने और चाँदी की ज़कात के समान है। इसकी वास्तविकता के अनुसार ज़कात के नियम इस पर लागू होते हैं। यह वास्तविकता तीन रूपों में प्रकट होती है:
Paper currency is the financial papers which the State issues and makes as its currency and money by which prices of goods and payments for services are assessed. The Zakat on this paper currency is the Zakat of gold and silver. The rules of Zakat apply to it according to its reality. This reality appears in three forms:
1. वह प्रतिनिधि काग़ज़ी मुद्रा जो राज्य द्वारा जारी की जाती है और धात्विक मुद्रा-प्रणाली के अनुसार चलती है। यह एक निश्चित मात्रा में सोना या चाँदी का प्रतिनिधित्व करती है और प्रचलन में उसकी स्थानापन्न होती है, तथा माँग किए जाने पर उसके बदले में दी जा सकती है। चूँकि इसे किसी भी समय सोने या चाँदी से बदला जा सकता है, इसलिए इस काग़ज़ी प्रतिनिधि को सोना या चाँदी माना जाता है, और इसकी ज़कात सोने या चाँदी की ज़कात बन जाती है। यदि यह सोने का स्थानापन्न हो और इसकी मात्रा 20 सोने के दीनार के बराबर पहुँच जाए, अर्थात् 85 ग्राम, जो सोने का निसाब है, तो इस पर एक वर्ष बीतने के बाद चौथाई दशांश (ढाई प्रतिशत) की ज़कात अनिवार्य होती है। यदि यह चाँदी का स्थानापन्न हो और इसकी मात्रा 200 चाँदी के दिरहम के बराबर पहुँच जाए, अर्थात् 595 ग्राम, जो ज़कात का निसाब है, तो इस पर चौथाई दशांश की ज़कात अनिवार्य होती है। इस काग़ज़ी मुद्रा में ज़कात के अनिवार्य होने का प्रमाण वही है जो सोने और चाँदी में ज़कात के अनिवार्य होने को दर्शाने वाली पहले उल्लिखित हदीसों का है। इसका कारण यह है कि यह सोने और चाँदी का प्रतिनिधि और स्थानापन्न है, और प्रतिनिधि या स्थानापन्न को मूल (अस्ल) का हुक्म प्राप्त होता है।